शेयर बाजार में फायदेमंद निवेश कैसे करें पूरी जानकारी – मार्केट एक्सपर्ट

शेयर बाजार में फायदेमंद निवेश कैसे करें –

शेयर बाजार में फायदेमंद निवेश कैसे करें, ये बता रहे हैं निवेश सलाहकार एस पी तुल्सियान और ग्रिफन इंवेस्टमेंट एडवाइजरी के आनंद टंडन। 

मिडकैप शेयरों में निवेश करना क्या सही है?

आनंद टंडन: मैं मार्केट वैल्यूएशन के आधार पर शेयरों को मिडकैप, स्मॉलकैप या लार्जकैप में नहीं बांटता हूं। शुरुआती दौर से निकलकर तेज विकास की ओर बढ़ने वाले शेयरों को मैं मिडकैप मानता हूं।

मिडकैप शेयरों में निवेश और वैल्यू के आधार पर निवेश दो अलग-अलग रणनीतियां हैं। वैल्यू इंवेस्टिंग में अंडरवैल्यूड शेयरों में निवेश किया जाता है। लेकिन, मिडकैप निवेश में 3-4 सालों के बाद शेयर की तेजी की उम्मीद से निवेश होता है।

वैल्यू इंवेस्टमेंट से मिडकैप निवेश ज्यादा आक्रात्मक होता है। मिडकैप में निवेश करते वक्त आपको पूरी जानकारी होनी चाहिए कि किस क्षेत्र में ग्रोथ की संभावनाएं सबसे ज्यादा हैं।

मिडकैप और लार्जकैप को कैसे अलग करते हैं?

एस पी तुल्सियान: आमतौर पर 100 करोड़ रुपये से कम मूल्यांकन वाली कंपनी को स्मॉलकैप का दर्जा दिया जाता है। वैसे ही, 100 से 1,000 करोड़ रुपये के मूल्यांकन वाली कंपनी मिडकैप और 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की कंपनी लार्जकैप कहलाती है। कोई भी कंपनी पहले स्मॉलकैप, फिर मिडकैप और आखिर में लार्जकैप बनती है।

लेकिन, निवेशकों के लिए इस आधार पर मिडकैप कंपनियों को ढूंढना मुश्किल है। आनंद टंडन का बताया हुआ तरीके से ज्यादा से ज्यादा रिटर्न दे सकने वाली मिडकैप कंपनियों में निवेश किया जा सकता है। किसी भी लार्जकैप कंपनी के मुकाबले मिडकैप कंपनी के पास विकास के लिए ज्यादा विकल्प होते हैं। इसलिए, मिडकैप शेयर 1 साल में 5 से 10 गुना रिटर्न भी दे सकते हैं।

शेयर की कीमत से कंपनी मिडकैप है या नहीं तय करना गलत है। लार्जकैप कंपनी के शेयर 50 रुपये के हो सकते हैं। वहीं, हो सकता है कि मिडकैप कंपनी के शेयर 250 रुपये के हों।

 निवेशक मिडकैप शेयरों को पुरानी और बड़ी कंपनियों के मुकाबले ज्यादा जोखिमभरा समझते हैं। क्या ये सही है?

आनंद टंडन: ये इस बात पर निर्भर करता है कि आपके लिए जोखिम क्या है। रिसर्च की कमी और शेयर लिक्विड न होने से मिडकैप शेयरों को जोखिमभरा माना जा सकता है। लेकिन, मिडकैप निवेश का मतलब है कि आप 20-30 फीसदी की तेजी की जगह कंपनी के शेयरों में कई गुना की बढ़ोतरी का लक्ष्य होता है।

लिक्वड्टी को मिडकैप शेयर के जोखिम समझना गलत है। बल्कि, जोखिम है कि क्या कंपनी 3-4 साल में 5-6 गुना बढ़ सकती है या नहीं।

मिडकैप शेयरों के लिए अच्छा मैनेजमेंट होना जरूरी है?

एस पी तुल्सियान: चाहे कंपनी लार्जकैप हो या मिडकैप, दोनो का मैनेजमेंट अच्छा होना जरूरी है। कंपनी के पिछले प्रदर्शन का रिकॉर्ड न होने से मिडकैप में अच्छे मैनेजमेंट का महत्व बढ़ जाता है।

आनंद टंडन: किसी भी कंपनी का मैनेजमेंट हमेशा अच्छा या खराब नहीं रहता। वक्त के साथ-साथ मैनेजमेंट और नीतियों में बदलाव होता ही रहता है। ऐसे में, कंपनी या प्रोमोटर के पिछले प्रदर्शन की जानकारी और कंपनी की विस्तार योजनाओं के आधार पर फैसला लेना ठीक रहता है।

सबसे ज्यादा जरूरी है कि क्या मैनेजमेंट के लक्ष्य और शेयरधारकों की उम्मीदों के बीच तालमेल है या नहीं। पहले एमएनसी के शेयरों में निवेश करना फायदेमंद माना जाता था। लेकिन, घरेलू कंपनियों के विदेश में कारोबार फैलाने के बाद से भारतीय कंपनियां एमएनसी से ज्यादा रिटर्न दे रहीं हैं।

एमएनसी में निवेश नहीं करना चाहिए?

एस पी तुल्सियान: हां, फिलहाल एमएनसी के मुकाबले भारतीय कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर है। जैसे, नई घरेलू फार्मा कंपनियां प्रोफेशनल लोगों द्वारा स्थापित की गईं हैं। पहले, उद्योपति या फिर उद्योग से जुड़ा घराना नए कारोबार शुरू करता रहा था। इससे मैनेजमेंट का महत्व पता चलता है।

उद्योग घरानों की कंपनियां प्रोफेशनल मैनेजमेंट की कंपनियों से कम रिटर्न देती हैं?

आनंद टंडन: ज्यादातर उद्योग घराने कमोडिटी के कारोबार में जुटे हुएं हैं, जैसे स्टील, पेपर। अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के बाद इन कंपनियों को विदेशी कंपनियों से टक्कर मिली। वहीं, प्रोफेशनल लोगों के पास पूंजी की कमी होती है, इसलिए वो ज्यादातर सर्विस सेक्टर में उतरते हैं, जहां पर वैल्यूएशन काफी ज्यादा है।

वैल्यूएशन के लिए आपकी क्या कसौटी है?

आनंद टंडन: सबसे ज्यादा जरूरी है कि कम मिडकैप शेयर से आपको ज्यादा से ज्यादा रिटर्न मिलेंगे। ये निर्भर करता है उस कंपनी या सेक्टर से जुड़ी नई सकारत्मक हलचल पर। जैसे कि, नए उत्पाद का लॉन्च होना, मैनेजमेंट में बदलाव, सरकारी नीतियों में बदलाव, नए कारोबार में उतरना। इन सब स्थितियों में कंपनियों के वैल्यूएशन में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी होती है।

अगर खराब प्रदर्शन को देखते हुए आप टेक्सटाइल शेयरों में पैसा नहीं लगाते हैं और सरकार कोटा हटा देती है। साथ ही, ब्याज दरें भी घट जाती हैं। अब वहीं शेयर ज्यादा रिटर्न दे पाएंगे, क्योंकि बाजार सीमित नहीं रहा और कर्ज सस्ता हो गया।

एस पी तुल्सियान: मेरे मुताबिक आनंद टंडन का बताया हुआ तरीका पूरी तरह से ठीक नहीं है। 2000 के बाद दिग्गज आईटी कंपनी इंफोसिस से ज्यादा रिटर्न मिडकैप कंपनियां दे रही हैं।

 तेजी की उम्मीद में निवेशक किसी भी भाव पर निवेश कर सकते हैं?

आनंद टंडन: नहीं, मेरा ये कहना नहीं था। मेरे मुताबिक पिछले प्रदर्शन और तेजी के बाद के प्रदर्शन की तुलना करना ठीक नहीं है। अगर आपको मिडकैप शेयर में तेजी की उम्मीद लग रही हो, तो उस शेयर की वैल्यूएशन न देखते हुए निवेश कर सकते हैं।

YE BHI PHADE –

SBI Life Insurance New IPO Lunch 

ICICI Lombard New IPO Lunch

THANK YOU..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *