ग्लोबल बाजार की वजह शेयर मार्केट में हलचल – मार्केट एक्सपर्ट

लंबी अवधि का रखें नजरिया, कहां लगाए दांव

बाजार की आगे की चाल और दिशा पर बात करते हुए सिटरस एडवाइजर्स के फाउंडर संजय सिन्हा ने कहा कि बाजार ये मान कर चल रहा है कि आज की पॉलीसी मीट में आरबीआई ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की कटौती कर सकता है, हालांकि दरों में 0.50 फीसदी कटौती की दरकार है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात ये हैं कि जो भी रेट कट आज की पॉलिसी में घोषित किया जाएगा, वो इस बात की ओर संकेत करेगा कि आरबीआई ने महंगाई के प्रति क्या नजरिया अपनाया है। क्योंकि आरबीआई के लिए ये बहुत जरूरी है कि वो वास्तविक इंटरेस्ट रेट को मेंटेन करे।

संजय सिन्हा ने कहा कि आरबीआई दरों में 0.25 फीसदी की कटौती की तो पूरी संभावना है लेकिन हो सकता है कि आज आरबीआई अपनी दरों में 0.50 फीसदी कटौती करके हमें एक सरप्राइज गिफ्ट दे दे।

ऑटो सेक्टर पर बात करते हुए संजय सिन्हा ने कहा कि अगले 36 महीनों तक के लंबे नजरिए से ऑटो सेक्टर बाजार एक ऐसा सेक्टर रहेगा जो निवेशकों को अच्छे रिटर्न देता रहेगा।

फार्मा शेयरों पर संजय सिन्हा का कहना है कि इस समय अगर आईटी और फार्मा में चुनाव करना पड़े तो फार्मा सेक्टर ज्यादा आकर्षक लग रहा है। फार्मा सेक्टर में लंबे नजरिए से टुकड़ों में रुक-रुक के निवेश करने की सिफारिश होगी।

संजय सिन्हा ने आगे कहा कि अब तक आए एफएमसीजी कंपनियों के नतीजे मिलेजुले रहे हैं। एफएमसीजी कंपनियों के नतीजों में एचयूएल ने सरप्राइज किया। जीएसटी को लेकर जो अनिश्चितता थी उससे पहली तिमाही में एफएमसीजी सेक्टर के नतीजो कमजोर रहने की उम्मीद थी। लेकिन इस सेक्टर को आगे जीएसटी से काफी फायदा मिलेगा। जीएसटी के बाद इस सेक्टर में असंगठित क्षेत्र से संगठित क्षेत्र की ओर प्रवाह बढ़ता दिखेगा और ये फैक्टर आगली कई तिमाहियों तक अपना असर दिखाएगा। अगर इस समय एफएमसीजी में कमजोरी है तो ये एफएमसीजी सेक्टर में निवेश करने का एक अच्छा मौका है, आगे एफएमसीजी शेयर अच्छा रिटर्न देंगे

एप्फ़ से नपस में निवेश

बाजार करेक्शन के लिए तैयार रहें: रुचिर शर्मा

भारत का बुल मार्केट बदल गया है और भारतीय बाजार के इस बार का बुल मार्केट काफी साफ-सुथरा रहा है। ये कहना है जाने माने अर्थशास्त्री और निवेशक रुचिर शर्मा का। उनका कहना है कि इस बार मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में अच्छी तेजी देखी गई है। रुचिर शर्मा का कहना है कि इस बार का बुल मार्केट सबसे अलग है। इस बार मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में ही तेजी देखने को मिली है। अपने दम पर आगे बढ़ने वाली कंपनियों में रफ्तार आई है। कंपनियां किसी खास सरकार के सहारे नहीं बढ़ रही हैं। पहले कमजोर कंपनियों में भी तेजी आ जाती थी।

रुचिर शर्मा का कहना है कि बाजार में लगातार बढ़ती तेजी से वैल्युएशन महंगे हो गए हैं। उन्होंने कहा कि ग्लोबल बाजारों में भी करेक्शन आना बाकी है। ग्लोबल बाजार करेक्शन के लिए तैयार रहें। ग्लोबल बाजारों में इस तरह की तेजी का ये दूसरा मौका है। बाजार में लगातार बढ़ती तेजी से वैल्युएशन महंगे हुए। ग्लोबल बाजारों की तेजी चिंता का विषय है। मॉनिटरी पॉलिसी से ग्लोबल बाजारों पर बड़ा असर पड़ा है। अगले 2 साल भारतीय बाजार ज्यादा मजबूत रहेंगे। यूएस मार्केट में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होगा, आगे इसके बढ़ने के आसार हैं। ट्रंप के फैसलों का अमेरिकी बाजार पर ज्यादा असर नहीं होगा। भारत दूसरे इमर्जिंग देशों के मुकाबले ज्यादा मजबूत है।

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