म्युचुअल फंड पर सख्ती, और निवेश से जुड़े 5 रिस्क से क्या होगा असर – मार्केट एक्स्पर्ट

म्युचुअल फंड पर सख्ती, क्या होगा असर! –

hello friends….. Mai aaj apko म्युचुअल फंड se realated news batne ja rha hu, ho sakta hai ki mutual fund pe sebi kuch naye rule lane wali hai. To sabhi investor ke liye bad news hai. Janniye market expert se.

आने वाले दिनों में हो सकता है कि कई सारी म्युचुअल फंड स्कीम बंद हो जाए। सेबी पैनल ने सिफारिश कि है एक म्युचुअल फंड हाउस की एक जैसी स्कीम बंद की जानी चाहिए। अगर सेबी की चली तो आने वाले दिनों में म्युचुअल फंड स्कीम घटकर आधी रह सकती है। फिलहाल इस वक्त करीब 2000 म्युचुअल फंड स्कीम बाजार में है। म्युचुअल फंड स्कीम को लेकर क्या है सेबी की सिफारिशें और इसका निवेशकों पर कैसा होगा असर, क्या उन्हें डरने की जरूरत है बात करने के लिए हमारे साथ हैं रूंगटा सेक्योरिटीज के डायरेक्टर हर्षवर्धन रूंगटा। 

NEWS

हर्षवर्धन रूंगटा का कहना है कि सेबी पैनल की सिराफिश के चलते म्युचुअल फंड्स घटाकर आधे करने की तैयारी की जा रही है। सेबी पैनल ने एक कैटगरी में एक जैसी स्कीम्स बंद करने का सुझाव दिया गया है। फिलहाल 2000 से ज्यादा तरह की म्युचुअल फंड्स स्कीम है जिसमें इक्विटी, डेट, हाइब्रिड, कैटेगराइज्ड करने की सिफारिश की गई है। इक्विटी में लार्जकैप, मल्टीकैप, मिडकैप, स्मॉलकैप जैसी सबकैटेगरी रखने और डेट में लिक्विड, अल्ट्रा शॉर्ट टर्म, और डायनमिक जैसी कैटेगरी रखने की सिफारिश की गई है।

अगर सेबी पैनल की सिफारिशे मानी जाती है तो एक म्युचुअल फंड हाउस की एक जैसी कई स्कीमें बंद हो सकती है। एक जैसी स्कीमों को मर्ज किया जाएगा। जिसके बाद म्युचुअल फंड स्कीमों की संख्या घटकर आधी हो जाएगी।

मौजूदा समय में म्युचुअल फंड की करीब 2 हजार स्कीमें बाजार में है। जिनमें से 42 फंड हाउस 20.6 लाख करोड़ के एसेट्स मैनेज कर रहे हैं।

हर्षवर्धन रूंगटा के मुताबिक अगर सेबी पैनल की सिफारिश लागू होती है तो इसका फायदा नए निवेशकों को मिल सकता है। सबसे पहले वह 2000 इन्वेस्टमेंट स्कीमों की लिस्ट से छुटकारा पा सकेंगे। एक कैटेगरी में आने वाले फंड्स को लेकर सफाई रहेगी और निवेशकों को निवेश में सुविधा होगी। एक जैसी कई स्कीम के ना होने से फंड चुनना आसान होगा।

हालांकि म्युचुअल फंड के पुराने निवेशक घबराए नहीं क्योंकि स्कीम बंद नहीं होनेवाली बल्कि वह एक-दूसरे में मर्जर हो सकती है। मर्ज हुए फंड में बिना किसी बदलाव के निवेश जारी रख सकेंगे। साथ ही मर्ज हुए फंड में निवेश पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा। स्कीम मर्ज होने से टैक्स पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। कैपिटल गेन फंड खरीदने की तारीख से ही जोड़ा जाएगा ना कि मर्ज होने की तारीख से नहीं। मर्ज हुए फंड से असंतुष्ट होने पर निवेश स्विच कर सकेंगे। स्विच करने पर कैपिटल गेन पर टैक्स लगेगा।

 म्युचुअल फंड निवेश से जुड़े 5 रिस्क –

म्युचुअल फंड इंवेस्टमेंट इज सब्जेक्ट टू मार्केट रिस्क! ये लाइन, आपने अक्सर सुनी होगी। कई इसे अनसुना कर जाते है, तो कई इस डिस्क्लेमर से इतना डर जाते हैं की निवेश ही नहीं करते। लेकिन योर मनी के रहते आपको डर कैसा? आज योर मनी में आपको इस डिस्क्लेमर का मतलब समझाएंगे, यानी, आपके निवेश के साथ कौन सा जोखिम जुडा है और इस से आप कैसे बच सकते हैं, और कैसे निवेश की सही रणनीति बना सकते हैं, इसी पर होगा योर मनी का फोकस। आज इस चर्चा में शामिल हो रहे हैं फाइनेंशियल प्लानर अर्णव पंड्या

RISK

हर निवेश से जुडा कोई ना कोई रिस्क होता है। लेकिन इसका मतलब ये नही, के आप निवेश ना करें और पैसे कमाने का सुनहरा मौका गवां दें। क्रेडिट रिस्क, इंटेरेस्ट रेट रिस्क, री-इंवेस्टमेंट रिस्क, मार्केट रिस्क, लिक्विडिटी रिस्क इन 5 तरह के जोखिम को अगर आप समझ लें तो निवेश रणनीति बनाना आसान हो जाएगा।

डेट में निवेश: क्रेडिट रिस्क

बता दें कि डेट में निवेश रिस्क फ्री नहीं है। इसमें कर्ज लेने वाली कंपनी के कर्ज ना चुका पाने का जोखिम होता है और निवेशक का निवेश डूबने का खतरा रहता है। लेकिन सरकारी सेक्योरिटीज में क्रेडिट रिस्क नहीं होता।

ब्याज दर का जोखिम

ब्याज दर बढ़ने से बॉन्ड के दाम घटेंगे यानि ब्याज दर बढ़ने से डेट निवेश पर नुकसान होगा। ब्याज दर घटने से डेट निवेश की वैल्यू बढ़ेगी। मेच्योरिटी तक बॉन्ड और डिबेंचर्स जैसे डेट निवेश रखने से रिस्क कम होता है।

रीइन्वेस्टमेंट रिस्क

इसको पैसे के दोबारा निवेश पर रिस्क कहते हैं। पैसे के रीइन्वेस्टमेंट पर नियम और शर्तें बदलने से रिस्क बढ़ जाता है। डेट इन्वेस्टमेंट में रिटर्न स्थिर नहीं है। डेट इन्वेस्टमेंट में रिटर्न समय-समय पर बदलता रहता है। लंबी अवधि के निवेश पर रीइन्वेस्टमेंट रिस्क पर ध्यान जरूर दिया जाना चाहिए।

बाजार से जुड़े रिस्क

ये बाजार के उतार-चढ़ाव से जुड़ा रिस्क है। उम्मीद से अलग बाजार की चाल पर रिस्क होता है। इक्विटी में निवेश पर मार्केट रिस्क होता है। खरीदने या बेचने के नजरिए पर बाजार की अलग चाल से नुकसान हो सकता है। निवेश पर स्टॉप लॉस रखकर ही ज्यादा नुकसान से बच सकते हैं।

लिक्विडिटी रिस्क

लॉक-इन पीरियड में निवेश कैश में नहीं बदल पाएंगे इसे ही लिक्विडिटी रिस्क कहा जाता है। खरीदार न होने की वजह से लिक्विडिटी रिस्क आ सकता है। रीयल एस्टेट और इक्विटी के निवेश पर लिक्विडिटी रिस्क ज्यादा होता है। इस पर काबू पाने के लिए निवेश डायवर्सिफाइड रखें।

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