जीएसटी (GST) क्या है और इसके बारे में पूरी जानकारी हिंदी में

     जीएसटी (GST) क्या हैं

  • जीएसटी वस्तु एंव सेवा कर (Goods and Service Tax) एक अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax) है।
  • जीएसटी एक एकीकृत कर है जो वस्तुओं और सेवाओं दोनों पर लगेगा।
  • जीएसटी लागू होने से पूरा देश,एकीकृत बाजार में तब्दील हो जाएगा और ज्यादातर अप्रत्यक्ष कर जैसे केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Excise), सेवा कर (Service Tax), वैट (Vat), मनोरंजन, ववलावसता, लॉटरी टैक्स आवद जीएसटी में समावहत हो जाएंगे।
  • इससे पूरे भारत में एक ही प्रकार का अप्रत्यक्ष कर लगेगा

      प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) 

  • प्रत्यक्ष कर वो कर होता है जिसे जिस व्यक्ति पर आरोपित  किया  जाता है,उसी से उसे वसूला जाता है !अर्थात् वह कर जिसे आपसे सीधे तौर पर वसूला जाता है उसे प्रत्यक्ष कर कहते है !
  • उदा. -आय कर, कृषि  कर, व्यवसाय कर, धन कर, संपत्ति  कर, निगम  कर, भू-राजस्व कर, पूंजी लाभ कर, उपहार कर

    अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax) 

  • ऐसे कर को अप्रत्यक्ष कर कहा जाता है, जिसका मोद्रिक भार दूसरों पर डाला जाता है अर्थात् कर का वास्तविक  भार उस व्यक्ति पर नही पडता जो उसे अदा करता है
  • उदा. -Excise Tax (उत्पाद कर), Custom Tax (सीमा शुल्क), Services Tax (सेवा कर), Market Tax/Vat (बाजार कर), Entertainment Tax (मनोरंजन कर), Sales Tax (बक्री कर) Stamp Duty

GOODS AND SERVICE TAX

 

     क्यों जरूरी है जीएसटी

  • भारत का वतामान कर ढांचा (Tax Structure) बहुत ही जटिल है।
  • भारतीय संववधान के अनुसार मुख्य रूप से वस्तुओं की बक्री पर कर लगाने का अधिकार राज्य सरकार और वस्तुओं के उत्पादन व सेवाओं पर कर लगाने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है।
  • इस कारण देश में अलग अलग तरह प्रकार के कर लागू है, जिससे  देश की वर्तमान कर व्यवस्था बहुत ही जटिल है
  • कम्पनीयों और छोटे व्यवसायों के लिए विभिन्न प्रकार के कानून का पालन करना मुश्किल होता है.
  • GST केवल अप्रत्यक्ष करों को एकीकृत करेगा, प्रत्यक्ष कर जैसे आय-करआदि वर्त्तमान व्यवस्था के अनुसार ही लगेंगे।
  • जीएसटी के लागू होने से पूरे भारत में एक ही प्रकार का अप्रत्यक्ष कर लगेगा जिससे वस्तुओं और सेवाओं की लागतमें स्थिरता आएगी
  • संघीय ढांचे को बनाए रखने के वलए जीएसटी दो स्तर पर लगेगा –सीजीएसटी (केंद्रीय वस्तु एंव सेवा कर) और एसजीएसटी (राज्य वस्तु एंव सेवा कर)।
  • सीजीएसटी का हिस्सा केंद्र को और एसजीएसटी का हिस्सा राज्य सरकार को प्राप्त होगा।
  • एक राज्य से दूसरे राज्य में वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री की स्थिति आईजीएसटी (एकीकृत वस्तु एंव सेवाकर) लगेगा।
  • आईजीएसटी का एक हिस्सा केंद्र सरकार और दूसरा हिस्सा वस्तु या सेवा का उपभोग करने वाले राज्य को प्राप्त होगा।

 

  • व्यवसायी ख़रीदी गई वस्तुओं और सेवाओं पर लगने वाले जीएसटी की इनपुट क्रेडीट ले सकेंगे जिनका उपयोग वे बेचीं गई वस्तुओं और सेवाओं पर लगने वाले जीएसटी के भुगतान में कर सकेंगे।
  • GST के तहत उन सभी व्यवसायी, उत्पादक या सेवा प्रदाता को रवजस्टडा होनाहोगा वजन की विाभर में कुल वबक्रीका मूल्य एक वनवित मूल्य से ज्यादा है।
  • प्रस्ताववत जीएसटी में व्यवसावययों को मुख्य रूप से तीन अलग अलग प्रकार के टैक्स ररटना भरने होंगे वजसमें इनपुट टैक्स, आउटपुट टैक्स और एकीकृत ररटना शावमल है।

 

     CGST, SGST और IGST क्या हैं ?

  • CGST,IGST और SCGT गुड्स और SERVICE TAX  के ही PART है जो भारत मे 1जुलाई से लागु होंगे.
  • राज्य के भीतर माल बेचने पर CGST(central goods and service tax) तथा SGST(state goods and service tax) लगेगा. उदाहरण. यदि  कोई राजस्थान का वक्ती राजस्थान  के वक्ती को माल बेचता है और उस वस्तु और उस वस्तु पर GST की रेट 18% है तो 9% CGST तथा 9% SGST लगेगा
  • और यदि  माल राज्य के बाहर के व्यक्ति  को बेचा जाता है तो 18 % की दर से IGST लगेगा |

 

     कौन-कौन लोग जीएसटी के दायरे  में आयेगे 

  • 1. 20 लाख रुपये या उससे कम सालाना कारोबार करने वाले जीएसटी के दायरे में नहीं आएंगे.पूर्वोत्तर और विशेष दर्जे वाले राज्यों जैसे जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंडऔर हिमांचल प्रदेश में ये सीमा 10 लाख रुपये होगी. ऐसे कारोबारी चाहे तो जीएसटी के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. ऐसा करने पर उन्हे इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा मिलेगा
  • 2. 20 लाख रुपये से ज्यादा (विशेष दर्जे वाले राज्यों में 10लाख रुपये) के सालाना कारोबार करने वालों को जीएसटीएन पर अपने पैन के जरिये रजिस्ट्रेशन  कराना होगा.
  • 3. 20 लाख रुपये से ज्यादा लेकिन डेढ़ करोड़ रुपये से कम तक का सालाना कारोबार करने वाले 90 फीसदी व्यापारी, कारोबारी, उद्यमी राज्य सरकार के नियंत्रण में आंएंगे जबकि बाकी 10 फीसदी केंद्र सरकार के तहत. कारोबारिओं की चयन लॉटरी के जरिये होगा.
  • 4. डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा का सालाना कारोबार करने वालों में आधे राज्य सरकार के अधीन होंगे जबवक बाकी केंद्र सरकार के अधीन. कौन से कारोबारी किसके अधीन आएंगे, इसका फैसला भी लॉटरी के आधार पर होगा.

 

     क्या-क्या है जीएसटी से बाहर

  • शराब पूरी तरह से बाहर है. बकायदा संविधान संशोधन विधेयक में इसका जिक्र  है. मतलब ये हुआ कि  पहली जुलाई के बाद पूर्व की तरह राज्य सरकारें आबकारी लगाती रहेंगी.
  • पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस अभी बाहर है. लेकिन तकनीकी तौर पर ये समझना जरुरी है कि ये संविधान में संशोधन के बाद हैं तो जीएसटी की दायरे में, लेकिन जीएसटी काउंसिल का फैसला है कि इन पर जीएसटी कुछ समय बाद ही लागू होगा. तब तक मौजूदा व्यवस्था के तहत केंद्र सरकारें और राज्य सरकारें उनपर कर लगाती रहेंगी.
  • शिक्षा और स्वास्थ्य से जुडी  सेवाएं जीएसटी से पूरी तरह बाहर हैं.
  •  GST (वस्तु और सेवा कर) में Tax Rates तय कर दी गयी हैं और इन GST Rates को मोटे तौर पर 5 भागों (Slabs) में बांटा गया हैं| -0%, 5%, 12%, 18% व 28%
  • आवकियकताओं और रोजमराा की वस्तुओं और सेवाओं पर कम टैक्स दरें रखी गयी हैं वहीीँ ववलावसता की वस्तुओंऔर सेवाओं पर GST की Rates High रखी गईं हैं|
  • GST की अधिकतम दर 28% रखी गयी हैं और करीब 19% वस्तुएं ऐसी हैं वजन पर 28% की दर से GST लगेगा|
  • जीएसटी के बाद ज्यादािर वस्तुएं सस्ती होंगी और सेवाएँ महँगी होंगी|

 

     वस्तुओं (Goods) वजन पर कोई टैक्स नहीं लगेगा  –0%

  • रोजमराा के सामन जैसे दूध, आटा, बेसन, ब्रेड, प्रसाद, नमक, वबंदी, वसंदूर, बटर वमल्क, दही, शहद, फल एवं सब्जियां फ्रेश मीट, फिश चिकन, अंडा, स्टांप. न्यावयक दस्तावेज, प्रिंटेड बुक्स, अखबार, चूड़ियाँ और हैंडलूम जैसे रोजमराा के सामान जीएसटी से बाहर रखे गए हैं.

     सेवाए  (Services) वजन पर कोई टैक्स नहीं लगषगा –0%

  • Hotels and lodges with tariff below Rs1,000,

       वस्तुओ (Goods) वजन पर 5% की दर सष टैक्स लगषगा

 

  • ब्रांडेड फ़ूड जैसे ब्रांडेड पनीर, फ्रोजन सवब्जयां, कॉफी, चाय, वफश वफलेट, क्रीम, वस्कम्ड वमल्ड पाउडर, मसाले,पिज़्ज़ा  ब्रेड, रस, साबूदाना, केरोसिन, कोयला, दवाएं, स्टेंट और लाइफबोट्स जैसी वस्तुएं

      सेवाए  (Services) जिन पर 5% की दर से  टैक्स लगेगा 

 

  • Transport services (Railways, air transport), small restaurants will be under the 5% category because their main input is petroleum, which is outside GST ambit.

 

      वस्तुए  (Goods) जिन पर 12% की दर से  टैक्स लगेगा 

 

  • सॉस, फ्रूट जूस, भुजिया नमकीन, आयुर्वेदिक दवाएं, फ्रोजन मीट प्रॉडक्ट्स, बटर, पैकेज्ड ड्राई फ्रूट्स, ऐनिमल फैट, टूथपाउडर, अगरबत्ती, कलर बुक्स, पीक्चर बुक्स, छाता,सिलाई मशीन और सेल फोन जैसी जरूरी आइटम्स को 12 पसेंट के स्लैब में रखा गया है।

       सेवाए (Services) जिन  पर 12% की दर से  टैक्स लगेगा 

  • Non-AC hotels, business class air ticket, fertilizers, Work Contracts will fall under 12 %GST

         वस्तुओं (Goods) जिन  पर 18% की दर से  टैक्स लगेगा 

 

  • जैम, सॉस, सूप, आइसक्रीम, इंस्टैंट फूड मिक्सेज, मिनरल वॉटर, फ्लेवडा ररफाइंड शुगर, पास्ता, कॉनाफ्लेक्स, पेस्रीज और केक, वप्रजव्डा वेवजटेबल्स, टिसु , लिफाफे, नोट बुक्स, स्टील प्रॉडक्ट्स, printed circuits, कैमरा, स्पीकर और monitors  पर 18फीसदी टैक्स लगाए जाने का निर्णय किया  गया है|
  • सेवाए जिन पर (Services) 18% की दर से टैक्स लगेगा 

 

  • AC hotels that serve liquor, telecom services, IT services, branded garments and financial

 

        वस्तुओं (Goods) वजन पर 28% की दर से टैक्स लगेगा 

 

  • पेंट, डीओडरन्ट, सेविंग  क्रीम, हेयर शैम्पू, डाइ, सनस्क्रीन, वॉलपेपर, सेरेमिक  टाइल्स, च्युइंगम, गुड़, कोकोआ रहित चॉकलेट, पान मसाला, मिनिरनल वाटर , वॉटर हीटर, डिशवॉशर, सिलाई मशीन,वाशिंग  मशीन, एटीएम, वेंडिंग मशीन, वैक्यूम क्लीनर,शव्रेर्स , हेयर क्लिपेर्स , ऑटोमोबाइल्स, मोटरसाइकल, निजी इस्तमाल  के लिए  एयरक्राफ्ट और नौकबिहर  को लग्जरी मानते हुए सबसे अधिक  टैक्स लेने का फैसला लिया गया  है.

       सेवाए (Services) जिन  पर 28% की दर से  टैक्स लगेगा 

 

  • 5-star hotels, race club betting, cinema will attract tax 28 per cent tax slab under GST
  • नोट –सोना-चांदी केलिए विशेष  दर 3फीसदी है जबकि महगी गाड़िया , लग्जरी गुड्स वाग्यरे  पर 15फीसदी की दर से अतिरिक्त सेस लगाने का प्रस्ताव है.
  • सेस से जो कमाई होगी, उसका इस्तेमाल राज्यों को जीएसटी लागू होने कीसूरत में होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए  होगा. उम्मीद है की  सेस से करीब 50हजार करोड़ रुपये की कमाई होगी.

 

     कितने प्रकार (Types) के  GST Return File करने होगे 

 

  • एक सामान्य टैक्सपेयर को GST में हर महीने तीन Return File करने होंगे और वर्ष के  अंत में एक return  File करना होगा|
  • इस प्रकार एक सामान्य टैक्सपेयर को वर्ष में करीब 37 return फाइल करने होंगे|
  • Composition Scheme छोटे Taxpayers के लिए  हैं  जिनका वार्षिक  turnover 50 लाख रूपये तक हैं|
  • इस स्कीम के Taxpayers के लिए सरल व्यस्थता  होती हैं|
  • Composition Scheme के तहत रजिस्टर्ड  taxpayer को हर तीन महीने में एक return  फाइल करना होगा और विा के अंत में एक Combined Return भरना होगा|
  • इस प्रकार कम्पोजीशन स्कीम वाले टैक्सपेयर को आसानी होगी और वर्ष में केवल 5 ही फाइल करने होंगे|

 

     जीएसटी का आम लोगों पर प्रभाव 

  • अप्रत्यक्ष करों का अंतिम  उपभोक्ता को ही वहन करना पड़ता है। present  में एक ही वस्तुओं पर बिबिभिन  प्रकार केअलग अलग टैक्स लगते है लेकिन जीएसटी आने से सभी वस्तुओं और सेवाओं पर एक ही प्रकार का टैक्स लगेगा जिससे  वस्तुओं की लागत में कमी आएगी।
  • हलाकि इससे सेवाओं की लागत बढ़ जाएगी
  • दूसरा सबसे महत्वपूणा लाभ यह होगा वक पूरे भारत में एक ही रेट से टैक्स लगेग वजह से सभी राज्यों में वस्तुओं और सेवाओं की कीमत एक जैसी होगी।
  • Goods and Service Tax Law (GST) लागू होने से केंद्रीय सेल्स टैक्स (सीएसटी ), जीएसटी में समाहित  हो जाएगा जिससे  वस्तुओं की कीमतों में कमी आएगी ।

 

 

      जीएसटी का व्यवसाय पर प्रभाव

  • वर्तमान  में व्यवसायों को अलग-अलग प्रकार के अप्रत्यक्ष करों का भुगतान करना पड़ता है जैसे वस्तुओं के उत्पादन करने पर उत्पाद शुल्क, ट्रेडिंग  करने पर सेल्स टैक्स, सेवा प्रदान करने पर सर्विस  टैक्स अदि ।
  • इससे व्यवसायों को बिभिन्न  प्रकार के कर कानूनों की पालना करनी पड़तीहै जो ki बहुत मुश्किल जटिल  कार्य  है। लेकिन  जीएसटी के लागू होने से उन्हें केवल एक ही प्रकार अप्रत्यक्ष क़ानून का पालन करना होगा जिससे  भारत में व्यवसाय में सरलता आएगी।
  • वर्तमान  में व्यवसायी, उत्पाद शुल्क व सेवा कर के भुगतान में विक्री  इनपुट क्रेडिट  (ख़रीदे गए माल पर चुकाए गए कर) का उपयोग नहीं कर सकता और विक्री  कर के भुगतान में सेवा कर(सेवाओं पर चुकाए गए कर) और उत्पाद शुल्क (ख़रीदे गए माल पर लगे उत्पाद शुल्क) की क्रेडिट  का उपयोग नहीं कर सकता।
  • इस कारण वस्तुओं और सेवाओं की लागत बढ़ जाती है। लेवकन जीएसटी के लागू होने से व्यवसावययों को सभी प्रकार की खरीदी गयी वस्तुओं और सेवाओं पर चुकाए गए जीएसटी की पूरी क्रेडिट मिल जाएगी जिसका  उपयोग वह बेचीं गयी वस्तुओं और सेवाओं पर लगे जीएसटी के भुगतान में कर सकेगा। इससे लागत में कमी आएगी

THANKU…..

 

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