जीएसटीएन से रिटर्न भरना हुआ और भी आसान

जीएसटीएन से रिटर्न भरना हुआ और भी आसान

जीएसटी में सामान बेचने और खऱीदने वालों को इन्वॉयस मैंचिंग के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है। ये कहना है जीएसटीएन के सीईओ प्रकाश कुमार का। सीएनबीसी-आवाज़ के साथ हुई खास बातचीत में प्रकाश कुमार ने आगे कहा कि इसके लिए जीएसटी नेटवर्क ने खास व्यवस्था की है।

अब तक जीएसटीएन का अनुभव कैसा रहा  25 जून के बाद जीएसटीएन में 1.6 लाख रजिस्ट्रेशन हुए हैं। 25 बैंकों से सरकारी खजाने में रकम आनी शुरू हुई है। जीएसटी की वसूली शुरू हो गई है। अपनी इस बातचीत में उन्होंने कारोबारियों से अपील की कि वे बिल के ब्यौरे सही-सही भरें। क्योंकि गलती होने पर बिल मैच नहीं करेगा।

बिल मैचिंग से जुड़े सवाल पर प्रकाश कुमार ने कहा कि इसके लिए बिक्री के बिल को अपलोड करना है। उसके बाद कंप्यूटर इस बिल को खरीदार के बिल से मैच करेगा। उन्होंने आगे कहा कि पहले कारोबारी वेट रकम रोक लेते थे लेकिन अब बिल अपलोड करने के लिए इंतजार ना करें। बेचने वाले के बिल अपलोड के बाद क्रेडिट मिलेगा। इससे कारोबार में और ज्यादा पारदर्शिता आयेगी। कारोबारियों को चाहिए कि वे रोजाना बिल अपलोड करते रहें।

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प्रकाश कुमार ने बताया कि जीएसटीएन पोर्टल पर 17 जुलाई से बिल अपलोड शुरू होगा। उन्होंने यह भी बताया कि रिटेल कारोबारियों को बिल अपलोड नहीं करना है। रिटेल कारोबारी महीने में एक बार रिटर्न भरेंगे। जीएसटीएन पोर्टल पर बी2बी कारोबारियों के लिए खास टूल हैं। इसके साथ ही बड़े उद्योगों के लिए सुविधा ऑपरेटर की व्यवस्था है।

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प्रकाश कुमार के मुताबिक मझोले कारोबारी जीएसटी के लिए ऑफलाइन टूल इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि जीएसटीएन से रिटर्न फाइल करना और भी आसान हो गया है। इसमें आपको सिर्फ बिक्री के ब्योरे देने हैं। खरीद के ब्योरे सिस्टम बना देगा। रिटर्न भी सिस्टम ही जनरेट करेगा। प्रकाश कुमार ने सफाई दी कि 3 रिटर्न की बात भ्रामक है। उन्होंने कहा कि कारोबारियों को अलग-अलग रिटर्न नहीं भरने हैं। आपको सिर्फ एक हिस्सा भरना है। दूसरा और तीसरा हिस्सा सिस्टम खुद तैयार करेगा।

रजिस्ट्रेशन की दिक्कत कितनी चुनौतीपूर्ण है? इस सवाल का जवाब देते हुए प्रकाश कुमार ने कहा कि नई चीजों में शुरू-शुरू में दिक्कत आती हैं। पुराने से नए टैक्स में आने वालों को प्रोविजनल आईडी देना होगा। प्रोविजनल आईडी ही स्थायी आईडी होगी।

बड़े डेटा के लिए जीएसटीएन की तैयारी से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए प्रकाश कुमार ने कहा कि जीएसटीएन ने ज्यादा ट्रांजैक्शन के लिए तैयारी की हैं और अपनी क्षमता बढ़ाकर दोगुनी कर ली हैं। जीएसटीएन वेबसाइट की रफ्तार बेहद तेज है। जिसके कारण कारोबारियों को बड़े डेटा के लिए चिंता का विषय नहीं है। जीएसटीएन ने करदाताओं की भीड़ का ध्यान रखा है। प्रकाश कुमार ने आगे कहा कि कारोबारी रिटर्न के लिए आखिरी तारीख का इंतजार ना करें क्योंकि बिल अपलोड में ही वक्त लगता है। रोजाना बिल अपलोड करेंगे तो आसानी रहेगी।

जीएसटीएन कितने साल का डेटा रखेगा? इसका जवाब देते हुए प्रकाश कुमार ने कहा कि जीएसटीएन में 7 साल तक का डेटा रखना ही हैं। अपील के मामले में अंतिम फैसले तक डेटा सुरक्षित रखा जायेगा। उन्होंने बताया कि राज्यों का बैकएंड सॉफ्टवेयर भी बना रहे हैं।

साइबर सुरक्षा से जुड़े सवाल पर प्रकाश कुमार ने कहा कि साइबर सुरक्षा सभी के लिए बड़ी चुनौती हैं। जीएसटीएन पोर्टल साइबर सुरक्षा के मामले में ISO27000 मानक को पूरा हैं। पोर्टल में कोड की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया हैं। इसमें सबसे बेहतरीन फायरवॉल का इस्तेमाल हुआ है। एक्सेस को लेकर नियम बेहद सख्त हैं। सर्वर की सुरक्षा एसपीजी जैसी की गई है।

10 अगस्त की तैयारियों पर प्रकाश कुमार ने बताया कि उनकी ओर से तैयारियां पुख्ता हैं। हर तरह के रिटर्न की टेस्टिंग की जा चुकी है। सुविधा देने वालों से भी टेस्टिंग की गई है। उन्होंने आगे कहा कि उनके लिए ये सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है।

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